THEMES

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Tuesday, September 25, 2012

पैसे पेड़ों पे उगते जो...

पैसे पेड़ों पे उगते जो  
कितनी खुशहाली होती
हर सख्स बनाता बगीचे 
हर तरफ हरियाली होती 

ना महंगाई पे दुःख होता 
ना कम आमदनी का रोना 
लोग रहते भी इन पेड़ो पे 
जंगल भरता हर कोना 



गरीब  कहीं ना ढूंढे मिलते 
अमीर बनता हर जन-मन 
न घोटाले, न भ्रष्टाचार 
न काला होता गोरा धन 

पर इसमें भी ये नेता 
अपना लोहा मनवाते
अन्न उगाने पर प्रतिबन्ध 
पैसों के पेड़ लगवाते 

विदेशी निवेश फिर इन 
बगीचों में भी मंगवाते 
बाकि इनमे जो रहते शेष 
वो तश्करी कर कमाते 

बातें आज जो होती हैं 
तब भी यूँ ही होती 
पर, पैसे पेड़ों पे उगते जो  
शायद खुशहाली होती....

Saturday, September 22, 2012

कमबख्त नौकरी, जीवन की एक मज़बूरी












ये ऊँची फंडू बातों में, कडवी तीखी सच्चाई 
मुख पर होती तारीफें, पीछे से खूब खिंचाई 

चापलूसी, चमचागिरी, कहीं हुस्न पे झुकाव 
अँधा भरोसा कहीं पर, कहीं हर बात में टकराव 

कहीं इर्ष्या, कहीं जलन, आपस में खिंचा-तानी 
राजनीति, कूटनीति, और साथ मिले बेईमानी 

जिक्र तनखा का हो, वो चुनावी लुभाते वादे
प्रमोसन में बरसों, इन्क्रीमेंट चंदों से आते 

ये रोज नये से टार्गेट, साहब की जी-हुजूरी 
कमबख्त नौकरी, जीवन की एक मज़बूरी


 Theme Suggested By: Mr. Rahul Mehta

Saturday, September 15, 2012

चाय से चाहत जुडी...

चाय से चाहत जुडी
कुछ को बस लगाव
कुछ के लिए नशा सा है
ना छुटे लाख उपाय 

कहीं अदरकी, कहीं इलाची 
कहीं खड़ी, कहीं कड़क 
लोकप्रियता इससे जुडी 
हर नुक्कड़, हर सड़क 

दिन के हर प्रहर का है 
इससे सीधा सा नाता 
सुबह सुबह हो बेड-टी
तो बिस्तर छूट पाता 

ऑफिस में महबूब सा 
चायवाले का इंतज़ार
कब आये, थोडा मूड बने 
हो थोड़ी गप-सप दो चार 

घंटो चलती मीटिंग्स हो
हो भाषण, ट्रेनिंग, सेमीनार 
टी ब्रेक ही बनता है हरदम 
सरदर्द का उपचार

वो इम्तिहान, वो सिलेबस
वो किताबी भारी रातें 
वो भागती घडी की सुई 
नींद की भीनी आहटें 

कि जागने से जुड़ा हो 
जब कभी खेल सारा 
तो ये ही एकमात्र पेय 
जो बनता है सहारा 

जोडियाँ जोड़नी हो 
हो रिश्तेदारी, व्यवहार 
चाय बनती है एक माध्यम 
या यूँ कहें इश्तेहार 

हो दोस्तों की महफ़िलें 
वो पहला प्यार, इज़हार 
इससे जुडी कई बरसातें 
वो लम्हा कोमल, यादगार 

इससे जुड़ा है जीवन
वो यादें अपरंपार 
वक़्त मिले लीजिये दो चुस्की 
करिये ख्यालों में दीदार 

चाय से चाहत जुडी....

Theme Suggested by: Ms. Meenakshi Kurseja
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