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Wednesday, July 4, 2012

गिरते हौसलों को संभाला है बहुत...


















गिरते हौसलों को संभाला है बहुत
अंधेरों में भी कहीं उजाला है बहुत
रूठे ज़िन्दगी से, हालातों से अक्सर 
आंसुओं को बहने से, टाला है बहुत

रंगीली दुनिया  क्या खूब लोग हैं 
गोरे चेहरों में मन, काला है बहुत 
चाह कर भी ना समझ पाए इनको 
हर एक इन्सां यहाँ निराला है बहुत 

सपने देखते हैं, देखना जरुरी है 
इरादों में पर भरा अटाला है बहुत 
चुनौतियाँ आती रही, जाती रही 
सबसे लड़ने को खद को, ढाला है बहुत  

गिरते हौसलों को संभाला है बहुत...

Image Courtesy: Mr. Jinit Soni

10 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब

M VERMA said...

गिरते हौसलों को सँभालने वाले ही संभल पाते हैं.
बहुत सुन्दर

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,,,सुंदर रचना,,,,

MY RECENT POST...:चाय....

kamaalnivato said...

Bahut hu badhiya......

meghna said...

mast..:)

Nidhi Shendurnikar said...

nice poem ..anybody who has struggled in life may relate with the lines

Keyur said...

Copied and pasted Nidhi Shendurnikar's comment......

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
:-)

Ila Pandya said...

Very bold attempt...!! Carry on..!!

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत सुन्दर......
बेहतरीन एहसास.......

अनु

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