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Saturday, May 19, 2012

चाहने से क्या होता है...















दिल चाहता है
पर चाहने से क्या होता है ?
अकेलापन कोई आदत नहीं होती 
पर हर मोड़ अकेला होता है...... 

हम कह भी दें की मौसम है आशिकाना 
पर भला कहने से, कहाँ होता है ?
ये इश्क एक बीमारी, हर कोई है रोगी 
इन रोगों का कहाँ इलाज़ होता है ?

कहीं हंसी है इसमें, तो कहीं नमी सी है 
कुछ कहते है फैसला, तकदीरों से होता है
 
दिल चाहता है
पर चाहने से क्या होता है...?




8 comments:

dheerendra said...

बहुत सुंदर पंक्तियाँ .अच्छी प्रस्तुति,,,,बधाई

MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: बेटी,,,,,
MY RECENT POST,,,,फुहार....: बदनसीबी,.....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चाहने से तो नहीं होता पर चाहने से कोशिश की जा सकती है ...सुंदर प्रस्तुति

M VERMA said...

बहुत खूब

br!nDle said...

loved it...awesomely written...:)

Harsh Patel said...

Bhai Ekdam jordar ur such bat btai he,

Blasphemous Aesthete said...

सच्चे दिल से चाहो, देखो क्या से क्या होता है =D


Cheers,
Blasphemous Aesthete

Ruchi Jain said...

Everything is not in our hands, but dil to dil hai,,
chahne se kya hota hai, ye lines maiko acha laga bahut,..:)

शिवनाथ कुमार said...

सही बोला आपने
चाहने से क्या होता है ...

सुंदर रचना !!

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