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Sunday, February 12, 2012

नाम तेरा पानी पे लिखा






नाम तेरा पानी पे लिखा 
न जाने कहाँ ओझिल वो हूवा 
फिर कोशिश कि बालू पर 
लहरें जो आई, बह वो गया 

सोचा पत्थर पर लिख डालूँ
न मिटे कभी, न हो सफा 
पर एक और पत्थर जो टकराया उसे 
टुकड़ों में वो तो बिखर गया 

हारकर उसे मेरे दिल पे लिखा 

अब इससे बेहतर जगह कहाँ 
हर पल में धडकता रहता है
न रोक सकूँ; न कर पाऊं जुदा

10 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही प्यारी और भावो को संजोये रचना......

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अब असली जगह लिखा है ॥अब नहीं बहेगा ॥ सुंदर प्रस्तुति

Reena Maurya said...

दील हि सही जगह है नाम कि ,,,
बहूत हि प्यारी ,प्यारी रचना है....

M VERMA said...

बहुत सुन्दर
दिल पर लिखा ही तो अमिट होता है

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

Madhuresh said...

Bahut achcha likha hai aapne, badhai!
(kabhi kabhi transliterate karne mein kuchh shabd sahi nahi aate google dwara, use sahi kar len, sone pe suhaga hoga!)

shefali said...

really badhia likha hai aapne aur sach me is se jyada achhi jaga kaha

ILA PANDYA said...

ekdum mulayam kavita rachi che!! khub gami !! hardik abhinandan !!

तू सवेरा ज़ुदा है माँ said...

wah kya baat hai

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