THEMES

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Friday, October 28, 2011

झूठा सच...


सच, 
आज कितना, 
झूठा हो गया है

स्वार्थ के बहानों में
गिरे हुवे से ईमानों में

प्रतियोगिता के नशे में 
हर दफ्तर में 
हर ठिकानों में

ढोंगी से रवैयों में 
समझे-जाने हुए,
अनजानों में 

उन बेशरम से 
रहीशों से 
उन्हीके 
घमंडी अरमानों में 

दर्द छुपा बस रह जाता 
गरीब-निर्धन के 
मकानों में  

सच, 
आज कितना, 
झूठा हो गया है

स्वार्थ के बहानों में....

Thursday, October 20, 2011

सोचा ना था.....











अब तो सपने भी रोने लगें हैं;
कल उठा तो तकिया-बिछोना भीना था
ज़िन्दगी तू इस कदर नाराज़ होगी मुझसे;
ऐसा कभी सोचा ना था..... 

बस कल की सी बातें, बरसों का साथ 
नोक-झोक, तकरार और उसमे छुपा प्यार 
रह जायेगा बस उन लम्हों का एहसास 
ऐसा कभी सोचा ना था..... 


वो हिम्मत, वो जज्बा, वो हौसला
एक कोशिश ज़िन्दगी से लड़ने की,
होगा वक़्त का ऐसा प्रहार 
ऐसा कभी सोचा ना था..... 

Tuesday, October 4, 2011

वक़्त कि खुदाई से, दोस्तों को पाया है












वक़्त कि खुदाई से 
बीते कई वर्षों में 
एक से बढ़कर एक
अदभुत, अनोखे, अमूल्य एवं अतूल्य
दोस्तों को खोजा है, पाया है 

तराशा है इनको शाब्दिक प्रहारों से
चमकाया है अविस्मर्णीय लम्हों को साथ जी कर
दूरियाँ इनकी चमक को हल्का नहीं करती 
कमबख्त डटे हुवे रहेंगे ज़िन्दगी से हरदम 

ये वो हैं जो ज़िन्दगी के 
सबसे हंसीं पलों से लेकर 
गमगीन पलों तक साथ रहे 
इन्ही से शायद जीने का हौसला पाया है

सिखा बहुत कुछ इनसे
जो थोडा आया सिखाया है 
कोशिश कि साथ देने कि 
जब कभी मौका पाया है 

ये ज़िन्दगी का त्यौहार है
हर वक़्त जिसे रंगा है रंगों से, रोशनी से जगमगाया है, 
ये ही हैं सफलता जीवन की
गर्व जिनपर हर एक सोच में, हर याद में
हो आया है
ये अज़ीज़ दोस्त हैं मेरे, जिन्हें 
वक़्त की खुदाई में पाया है

This poetry is dedicated to all the FRIENDS till time.
ये पंक्तियाँ आज तक के सभी दोस्तों को समर्पित है. 



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