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Tuesday, September 7, 2010

मुलाकात...


कभी कुछ पल हमारी-आपकी मुलाकात हो,
तनहा सी निगाहों के कुछ ताल्लुकात हो। 
कैद नजरों में आपको कर लूँ इस तरह, 
फिर जब चाहूँ, जहाँ चाहूँ आपका साथ हो। 

कि दिन भी न ढला हो, न हुई रात हो, 
फिजा आपसे महके, नर्म एहसास हो। 
कुछ हम बोलें, कुछ आपकी बात हो, 
और कुछ अनकहे से थोड़े संवाद हो ।

खुश आप हों, हम तो होंगे ही जरुर, 
लगे यूँ कि मानो कोई त्यौहार हो ।
उपहार में दे दूँ दिल मेरा आपको,  
आमने सामने भी कभी इजहार हो ।

रोक दूँ वक़्त के उन हर एक लम्हों को, 
बस आप हों, मैं हूँ, और प्यार ही प्यार हो । 
भुला दूँ ये दुनिया,सारी कायनात को, 
न जाने फिर भला कब ये इत्तेफाक हो ।

Image Courtesy: 1. Google, 2. Ms.Shambhavi Upadhyay

6 comments:

Nidhi said...

its nice ...full of feelings and i like the line where you say that love is expressed in unsaid words...

geetangali said...

very good.........mulakat ho

ILA said...

XTRA-ORDINARY**********************!

Anonymous said...

Excellent buddy!! its not everyone's cup of tea to put your feelings in words that too in such way!! great..keep it up..

meghna said...

awesome, beautiful....perfect for monsoon. :))

Shashank said...

Simple and Best...
Keep it up... :)

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