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Wednesday, February 10, 2010

प्यार




प्यार को देखने के कई है प्रकार
अलग-अलग दृष्टिकोण, अलग-अलग विचार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _

सबसे पहले आता माँ का प्यार
जिससे गहरी न कोई गहराई, न ऊची कोई मिनार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
फिर आता पिताजी का प्यार
जिनका खून दौड़ता रगों में, जिनसे मिलती सुख-सुविधा अपार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
फिर आता भाई - बहन का प्यार
जिसका प्रतिक माना जाता रक्षाबंधन का त्यौहार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
यू तो कम पाया जाता भाईयों में प्यार
पर इनमें भी होता है मोह और स्नेह अपार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
फिर आता दादा-दादी का प्यार
जिसमे होती ममता, करुणा और लाड़-प्यार की बरसात
कहा है यूँ जाता कि "मूल से ज्यादा प्यारा होता ब्याज"
प्यार को _ _ _ _ _ _ _

फिर आता देवर-भाभी या भाभी-ननंद का प्यार
जिसमे होती थोड़ी शरारत, थोड़ी छेड़छाड़
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
फिर आता पति-पत्त्नी का प्यार
समझ, सुझबुझ और सम्मान के साथ प्यार
ये बनाते दीर्घ जीवन - व्यवहार
चाहे आये सुनामी, या भूकंप या बाढ
ये देते सबको अपने प्यार से पछाड़
प्यार को _ _ _ _ _ _ _

आइए अब जाने प्रेमी-प्रेमिका का प्यार
जिसमे होते नित नये आयाम
बहुत सारे वादे, चंद होते साकार
पर प्रेम हो सच्चा, तो बदलता जीवन-व्यवहार
अन्यथा हर दिन लगती जिन्दगी एक भार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _

कृष्ण थे एक थी गोपियाँ हजार
पर आज कि न ये स्थिति, न य़ू लगी कतार
इसलिए समझिए मेरे दोस्त, मेरे यार
किसी एक को चुनिये, किजिए केन्द्रित विचार
अन्यथा होगी बीमारियाँ, व् समस्याएं अपार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
इस तरह प्यार से ही जीवन
प्यार से ही हर रिश्ता-व्यवहार
प्यार का न किजिए तिरस्कार
क्योंकि इसके बिना तो है जीवन निराधार
प्यार को _ _ _ _ _ _ _
-
प्रकाश जैन

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