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Wednesday, December 30, 2009

मुश्किल है...



सूखे वृक्षों पे पक्षियों का आना, मुश्किल है
बिना भूख भोजन कर पाना, मुश्किल है
मोह-माया रख बैरागी बन जाना, मुश्किल है
देवालयों में इश्वर को पाना, मुश्किल है
अभ्यास बिना निपुणता पाना, मुश्किल है
साहस बिना सफलता पाना, मुश्किल है
दुश्मन से प्रसंसा पाना, मुश्किल है
धनिक को घमंड न आना, मुश्किल है
पहले प्यार को भुलाना, मुश्किल है
पहली दुत्कार को भुलाना, मुश्किल है
क्रोध को काबू कर पाना, मुश्किल है
संयम रखकर जी पाना, मुश्किल है
बुरा देख आवाज उठाना, मुश्किल है
सच्चाई की राह पे जाना, मुश्किल है

मुश्किल है मगर सब मुमकिन है
बिना प्रयास के मुमकिन कर पाना, मुश्किल है
-
प्रकाश जैन
३०.१२.०९

Friday, December 4, 2009

यार, वो भी क्या दिन हुआ करते थे !!!














यार, वो भी क्या दिन हुआ करते थे 
जब हम साथ जिया करते थे 
क्लासरूम हो, लोबी हो, या हो पार्किंग 
हम हर जगह कुछ नया ही किया करते थे 
यार, वो भी... 
 
एक दूजे की बड़ाई, दूजे ही पल खिंचाई
तो कभी-कभी थोडी सी कर लेते थे लडाई 
हमारे याराने को देखकर दूसरे  

अक्सर जला करते थे
यार, वो भी...

क्लास छोड़ फिल्मों मे जाया करते थे 
घर मे देर होने पर, 
एक्स्ट्रा लेक्चर कारण बताया करते थे
कितनी आसानी से घरवालों को 
हम उल्लू बनाया करते थे 
यार, वो भी...

वो साथ बैठ कर घंटों बातें
गाया - बजाया करते थे 
कभी ओरिजिनल, तो कभी तोड़ मरोड़ 
गानो को गाया करते थे
वो नौटंकी, वो शरारतें  
सब खुश हो जाया करते थे 
यार, वो भी...

वो टिफीन पर एक-दूजे का इंतज़ार 
वो कोंट्री वाली पार्टियाँ, चायवाले का उधार 
हॉस्टल में फीस्ट खाने में 
शर्तें लगाया करते थे 
यार, वो भी..

वो एक्जाम्स से ठीक पहले, 
रीडिंग मटेरिअल ढूँढा करते थे 
लाइब्रेरी मे बैठ कर नोट्स बनाया करते थे 
सिर्फ एक दिन की पढाई मे 
पूरा पेपर लिख आया करते थे 


यार, वो भी क्या दिन हुआ करते थे 
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