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Wednesday, October 7, 2009

आसान नहीं...


हर चाह को पाना, आसान नहीं,
गम में मुस्कुराना, आसान नहीं
सफलता के रास्ते टेढ़े-मेडे बड़े
सही रास्ता पाना, आसान नहीं
जिन्हें प्यार किया हो दिल से
उन्हें कभी भी भुल पाना , आसान नहीं
शब्द जुड़ते हैं बनती है सरगम
बिना सरगम के गाना, आसान नहीं
खुशनुमा हादसे भी होते हैं जीवन में कभी
हादसों को पुनः दोहराना, आसान नहीं
सलाह- सीख दे सकता है हर कोई
पर उन्हें खुद अपनाना, आसान नहीं
हो लाख समझदारियां हममे भले
स्वयं को समझाना, आसान नहीं
आजमा लेते हैं दूसरों को हरदम
खुद को आजमाना, आसान नहीं
विचारों के संयोजन से बनती है कविताएँ
पर हमेशा एक से विचार पाना, आसान नहीं

-प्रकाश जैन
लि: ०७.१०.२००९

1 comments:

Young Turk said...

jeevan me kuch bhi aasaan nahi ... par jaisa tumhari dusri kavita me likha hai..ki mushkil hai par mumkin hai!!!

I feel that there is a good connection between these two poems.

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