फसबूक पर एक NGO के पेज पे ये तश्वीर मिली, जिसे एक मित्र ने LIKE किया और ये मुझे द्रश्यमान हुई....सन्देश बहुत तगड़ा था
I salute this mother, she knows the value of education even though she lives below poverty line! Support people who live with hopes to educate & achieve big in this world!
बस फिर कुछ मैंने भी लिख दिया, आप भी पढ़िए....और हाँ अपनी संतानों को पढ़िये जरूर... हो सके तो किसी को पढने में यथासंभव मदद भी कीजिये....
ना बस्ते, ना घंटियाँ
ना परीक्षा-परिणामों की कुतूहल
संघर्ष में ही बीता जीवन
कठिनाइयाँ रही हर पल, हरदम
कभी भूखे सोये, कभी थोडा भोजन
इन्ही रास्तों पे कटी जवानी व् बचपन
हालत कुछ आज भी वैसे ही है
पर नहीं होने दूँगी मेरे जैसा 'पुनरावर्तन'
पढ़ाऊगी तुझे मैं
जीते-जी पुरे दम-ख़म
चाहे करना पढ़े लाख श्रम
ना पीछे हटूंगी ये मेरा दृढ मन
शिक्षित तू होगी
होगा स्वप्न पूरा
की हमारा भी होगा
ये जीवन कभी मधुबन....
I salute this mother, she knows the value of education even though she lives below poverty line! Support people who live with hopes to educate & achieve big in this world!
बस फिर कुछ मैंने भी लिख दिया, आप भी पढ़िए....और हाँ अपनी संतानों को पढ़िये जरूर... हो सके तो किसी को पढने में यथासंभव मदद भी कीजिये....
देखी ना मैंने कभी,
किताबों की हलचल ना बस्ते, ना घंटियाँ
ना परीक्षा-परिणामों की कुतूहल
संघर्ष में ही बीता जीवन
कठिनाइयाँ रही हर पल, हरदम
कभी भूखे सोये, कभी थोडा भोजन
इन्ही रास्तों पे कटी जवानी व् बचपन
हालत कुछ आज भी वैसे ही है
पर नहीं होने दूँगी मेरे जैसा 'पुनरावर्तन'
पढ़ाऊगी तुझे मैं
जीते-जी पुरे दम-ख़म
चाहे करना पढ़े लाख श्रम
ना पीछे हटूंगी ये मेरा दृढ मन
शिक्षित तू होगी
होगा स्वप्न पूरा
की हमारा भी होगा
ये जीवन कभी मधुबन....
पहली बार तश्वीर देख कर कविता लिखने का प्रयोग किया है...















