THEMES

LIFE (33) LOVE (21) IRONY (15) FRIENDSHIP (6) INSPIRATIONAL (6) NATURE (3)

Thursday, March 15, 2012

पुनरावर्तन

फसबूक पर एक NGO के पेज पे ये तश्वीर मिली, जिसे एक मित्र ने LIKE किया और ये मुझे द्रश्यमान हुई....सन्देश बहुत तगड़ा था 
I salute this mother, she knows the value of education even though she lives below poverty line! Support people who live with hopes to educate & achieve big in this world!  


बस फिर कुछ मैंने भी लिख दिया, आप भी पढ़िए....और हाँ अपनी संतानों को पढ़िये जरूर... हो सके तो किसी को पढने में यथासंभव मदद भी कीजिये....



देखी ना मैंने कभी, 
किताबों की हलचल
ना बस्ते, ना घंटियाँ
ना परीक्षा-परिणामों की कुतूहल

संघर्ष में ही बीता जीवन
कठिनाइयाँ रही हर पल, हरदम
कभी भूखे सोये, कभी थोडा भोजन
इन्ही रास्तों पे कटी जवानी व् बचपन

हालत कुछ आज भी वैसे ही है
पर नहीं होने दूँगी मेरे जैसा 'पुनरावर्तन'
पढ़ाऊगी तुझे मैं
जीते-जी पुरे दम-ख़म
चाहे करना पढ़े लाख श्रम
ना पीछे हटूंगी ये मेरा दृढ मन

शिक्षित तू होगी
होगा स्वप्न पूरा
की हमारा भी होगा
ये जीवन कभी मधुबन....



पहली बार तश्वीर देख कर कविता लिखने का प्रयोग किया है...

Saturday, March 3, 2012

वो कुछ पल जो तेरे साथ बीते हैं...

वो कुछ पल जो तेरे साथ बीते हैं
आज भी बस हम उन्ही में जीते हैं
ख्यालों में कितनी रहती है अमीरी 
कलम पीने लगी, जाम लिखते हैं 

शरारतें, वो मस्ती, रूठना - मनाना
बेमतलब थोड़े फूले- फूले से रहते हैं   
धडकनें बढ़ी, कभी सांसें थम ही गई 
अदाओं में तेरी,  तीखे सलीके हैं 

खामोशियों में अक्सर होती बातें 
बिना कहे ही, काफी कुछ सुनते हैं 
होठ जब कभी तेरे, लेते हैं अंगड़ाई 
नज़रें गडी सी उनपर, बेचैन रहते हैं 

वो कुछ पल जो तेरे साथ बीते हैं
आज भी बस हम उन्ही में जीते हैं...

Image Courtesy: Ms.Shambhavi Upadhyay

Saturday, February 18, 2012

अनजाना ही अच्छा हूँ...














मुझे जान कर करोगे क्या 
अनजाना ही अच्छा हूँ 
भीड़ में खोया खोया सा 
बेगाना ही अच्छा हूँ

भला, नाम में  क्या रखा है? 
इस प्रकृति का ही बच्चा हूँ
समझा हुआ सा नासमझ 
थोडा पगला सा ही अच्छा हूँ 

कि प्यार है मुझमे भी 
भक्त सौन्दर्य का मैं सच्चा हूँ
यूँ संबंधों में ना जक्ड़ो में 
आज़ाद दीवाना अच्छा हूँ 

कभी खुश हूँ, कभी व्याकुल 
भावुक हूँ, थोडा सा बच्चा हूँ 
जिंदगी सफ़र, बस चलता रहा 
मुसाफिर मस्ताना अच्छा हूँ  

Thursday, February 16, 2012

नजारा बदलेगा


नज़र बदली, नज़रिये बदले,  
नजारा भी बदलेगा 
दिन आज नहीं तो कल, 
हमारा- आपका भी बदलेगा 


दुःख-पीडा, परेशानी-संकट 
सारा ताल जायेगा 
बुद्धि-श्रम, दृढ हौसलों के आगे, 
समय पलट ही जायेगा 

प्रेम-धैर्य, विश्वास-लगन से
मौसम पलटी खायेगा 
अरमानों के बादल बरसेंगे,
सुख ही सुख छा जायेगा 

अदा बदलेगी, अंदाज़ बदलेगा, 
लोगो का हमारे प्रति मिजाज़ बदलेगा  
आज जो कोई रखता है दूरी, 
कल आस पास टहलेगा.

नज़र बदली, नज़रिये बदले, नजारा बदलेगा ...

Sunday, February 12, 2012

नाम तेरा पानी पे लिखा






नाम तेरा पानी पे लिखा 
न जाने कहाँ ओझिल वो हूवा 
फिर कोशिश कि बालू पर 
लहरें जो आई, बह वो गया 

सोचा पत्थर पर लिख डालूँ
न मिटे कभी, न हो सफा 
पर एक और पत्थर जो टकराया उसे 
टुकड़ों में वो तो बिखर गया 

हारकर उसे मेरे दिल पे लिखा 

अब इससे बेहतर जगह कहाँ 
हर पल में धडकता रहता है
न रोक सकूँ; न कर पाऊं जुदा

Saturday, February 4, 2012

सर्द-जुकाम....An Ode to Cold n Cough





ठण्ड का प्रकोप कुछ इस तरह से बढ़ रहा
हर किसी का कमबख्त नाक है बह रहा 
जुकाम ने धीरे- धीरे रफ़्तार बढाई है 
अ आं....छी, आं....छी, करते सामत आई है 


शुरू  शुरू में बहता था बस 
अब वन-वे ट्राफिक बंध हूवा 
कफ का जमावड़ा सीनों में 
बुलंद हूवा, प्रचंड हूवा 


डॉक्टर बने लेकर खुद ही 
बाजारी चंद दवाएं 
कमबख्त हालत और बिगड़ी 
गला भी अब बंध हूवा 


की सांसें ले रहे मूह से 
गाढ़ा पीला कफ बनता है 
हर रोज किलो- दो किलो 
प्रोडकशन निकलता है 


की घरेलु इलाज़ भी आजमाए 
पिये अदरकी चाय व् काढ़े 
गला खोलने को न जाने
किये कितने गरारे 


तभी किसी ने कहा 
चादर ओढ़ भाप भी ले लो 
हमने कहा भाई बस जिन्दा हैं 
चाहो तो जान ही ले लो 


रोजाना मानव ये बदतमीज़ बीमारी 
झेल रहा, बस सह रहा 
हर  किसी को सर्द-जुकाम लगी है; 
हर किसी का कमबख्त नाक है बह रहा....  



A complete different theme suggested by : Ms.Meghna Bhatt

Thursday, January 19, 2012

हमें हर मौसम पसंद है...

अभी कुछ दिन पहले एक मित्र ने कहा प्यार पर कुछ मजा आये थोडा Positive Feel हो ऐसा कुछ लिखो, हमेशा गम लिखते हो.....तो बस एक Experiment (प्रयोग/परिक्षण) कर ही डाला हमने भी....

पेश है एक 'खयाली पुलाव'....पात्र, मौकाए- वारदात, एवं विचार काल्पनिक है ....:-)



तेरा मूड (Mood) बदलते मौसम सा 
हमें हर मौसम पसंद है...

हंसती हुई, चहकती हुई 
बारिश की भीनी बूंदों सी 
वो ताजगी, वो चुलबुलापन 

हमें हर मौसम पसंद है...


गुस्से में तू जब-जब 
आगबबूला हो जाती है 
वो फूला हुवा थोडा चेहरा तेरा

हमें हर मौसम पसंद है...

जब जब बाहों में लूँ तुझे 
उस मूड को क्या करूँ बयां 
तू मुझमें, मैं बस तुझमें ही

हमें हर मौसम पसंद है...

की सुष्क होठ मिले, हम एक हुवे 
बाकी कुछ शब्द अब याद नहीं 
निशब्द किया, ख़ामोशी ने  

हमें हर मौसम पसंद है...