THEMES

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Tuesday, March 7, 2017

तेरा होना ही एक उत्सव है, तू है तो हर दिन त्यौहार है

ये कविता केवल महिलाओं के लिए, उन्ही को समर्पित।  

मानव संसाधन (Human Resources( में कार्यरत एक दोस्त ने 'महिला दिवस' पर अपने साथ कार्य करने वाली महिलाओं को साझा करने के लिए कोई कविता मांगी, कुछ तैयार था नहीं पर जो हो पाया वही उन्हें भी भेज दिया, आप को भी पढ़ा ही देते हैं:-) पर ध्यान रहे सिर्फ एक दिन मनाने भर से काम नहीं चलेगा, हर दिन ही एक उत्सव हो उनके होने का, हर दिन त्यौहार हो ..वो क्या है न कि कई बार बड़ी देर हो जाती है ये समझ पाते-पाते .. आइये कविता पढ़ें  .



तुझसे ही पहले शब्द मिले 
तेरे ही सारे संस्कार ये है 
तेरा होना ही एक उत्सव है 
तू है तो हर दिन त्यौहार है  

है रूप अनेकों तेरे हैं 
तेरे ही रंगों से संसार चले 
तुझसे ही घर, घर बन पाए 
तुझसे ही तो परिवार जुड़े 

तू ही प्रेरणा, तू ही लगन 
तू आस्था, तू ही अनुशाषन 
ममता, स्नेह व् प्रेम तू ही  
तू ही साहस, तू ही संयम

तुझमे सपनो का दरिया 
है हौसलों की पतवार तू ही  
तुझसे ही पाया जीवन है 
तेरे होने से ही है जीवन ही 
तेरा होना ही एक उत्सव है 
तू है तो हर दिन त्यौहार है 


Theme/Subject by: Shubhangini Vatturkar
Image: Google से साभार  

Friday, November 25, 2016

मुश्किल ये है की, खुल कर बात होती नहीं ..

हम सब न जाने कितनी ही कहानियां, अनुभव, दर्द , चिंताएं आदि लिया फिरते हैं। जिसे किसीसे बांटना चाहते हैं, बताना चाहते हैं।  पर किसे? हर बात हर किसीसे तो नहीं कही जाती न ? आप कहेंगे किसी अपने से, पर अपने-अपनों में भी नाना प्रकार के भाव निकलते हैं (क्या सोचेंगे, क्या समझेंगे, क्रोधित होंगे, वगेरह वगेरह) । इसी चक्कर में एक भोज बढ़ता जाता है जिससे एक तरह का डिप्रेशन भी जन्म लेता है। 

जापान में तो अकेलापन इस कदर हावी हुवा की हर कोई ग्रस्त है। एक युवा (Takanobu Nishimoto) ने इस समस्या का समाधान निकाला और बाकायदा एक व्यवसाय बना डाला (Ossan - Rent men), इनके सदस्य आपको बड़ी आत्मीयता से सुनते हैं, इनसे आप कुछ भी बात कर सकते है, कह सकते हैं, बिना किसी जिझक और चिंता के। बदले में इन्हें एक घंटे का लगभग एक डॉलर प्राप्त होता है।  भारत में ये सुविधा मैं सुरु करना चाहूंगा, कृपया संपर्क करें:-) कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष छूट :-). 

चलिए कविता पढिये और खुल कर बतियाना शुरू कर दीजिये बस ..     


हर किसी के मन में 
है इक पिटारा भरा हुवा  
मुश्किल ये है की  
खुल कर बात होती नहीं 

किसे है वक़्त फुरसत वाला 
कहाँ धीरज ही है सुनने की, 
समझने की 
जैसी चाहिए वैसी 
मुलाक़ात होती नहीं 
मुश्किल ये है की, 
खुल कर बात होती नहीं ..   

इक झिझक सी हैं कहीं 
कहने में, बताने में 
क्या सवाल होंगे
क्या सोचेंगे, क्या समझेंगे 
क्या प्रतिक्रिया होगी 
झुंझलाहट ये 
समाप्त होती नहीं 
मुश्किल ये है की, 
खुल कर बात होती नहीं ..   

डर भी है बना
हर पर्सनल वाली बात पर  
कहीं ये बातों-बातों में 
फैलेगी तो नहीं 
इस भरोसे के कहीं 
कागजात होते नहीं 
मुश्किल ये है की, 
खुल कर बात होती नहीं ..   

और वो बिन मांगे मिलनेवाली 
सलाह हर बात में 
हर बात के अनुपात में
किसी भी विषय में क्यों हम  
अज्ञात होते नहीं ?
मुश्किल ये है की, 
खुल कर बात होती नहीं ..   

Saturday, September 3, 2016

पोर्टरेट ऑफ किरायेदार


हर वो मकान याद है, 
जिसे हमने घर बनाया था
दीवारों में जब बस जाए परिवार, जीवन  
उसे ही घर कहते हैं न ? 

बड़ी बारीकी से टंटोला था, 
हर बार खाली करते समय 
कहीं कुछ रह न जायें, छूट न जाये 
पर फिर भी रह गया; कुछ न कुछ; 
नहीं बल्कि बहुत कुछ

सामान वगैरह तो ज्यादा नहीं 
पर वो जिंदगी जो हमने जी थी वहाँ  
लम्हे हंसी-ठिठोलियों के, ख़ुशी के 
वो संघर्ष जो लड़ते रहे, 
या गम जो बाँट लिए 

वो सपने अधूरेवाले 
आज भी पड़े होंगे कहीं; 
अलमारियों के कोने में  
वो कील जो लगा दी थी दीवालों पे हमने, 
उन्हें अपना सा समझकर   
वो खिड़कियां, नज़ारे
वो बीत मौसम, सुबह शाम 

इन्ही में कहीं कोई 
जो छोड़ गया साथ 
मुरझा गया था वो घर भी मकान होकर 
छूट ही तो गया न सब 

न जाने कितने ही मकान 
राह तकते होंगे हमारी, 
कोई आये थोड़ा जीवन मिले 
फिर से ये चार दीवारी घर बने 


   








Thursday, April 30, 2015

उदाहरण कुछ करके दीजिये, लोग बेहतर समझेंगे



अमीरी दिलों-रिश्तों में हो तो कुछ बात है 
कोठी-जायदादों में भला क्या रक्खा है
सम्बन्धो में बनना-बिगड़ना लगा रहता है 
प्यार ढूंढिए आपने आपमें ही छुपा रक्खा है 

फ़ोन- इंटरनेट से चले; संपर्क हेंग ही हुवे  
दिखावटी इस सोसियलपने में क्या रक्खा है 

राजनीति वादों से ही है चलती रही सदा   
फ़िज़ूल उम्मीदों को सबने बनाये रक्खा है 

भ्रष्ट को ही ट्रस्ट आप बस करते जाइए 
इन आदतों को हमने ही बढ़ा रक्खा है 

एक अरसे से कर(tax) भरकर भी न विकसित हुवे 
इस ईमानदारी को मुश्किल से बनाये रक्खा है 

उदाहरण कुछ करके दीजिये, लोग बेहतर समझेंगे 
सलाह-मश्वरे कोरी बातें हैं, बातों में भला क्या रक्खा है 


शब्दार्थ:
हैंग (Hang) - रुकावट, अटक जाना का अंग्रेजी शब्द (आजकल आम समस्या है :-)  )   
सोसियलपना - अधिक सामाजिक होने के दिखावा जो केवल यांत्रिक है (नया प्रायोगिक शब्द अंग्रेजी मिलावट के साथ),  


करीब एक साल बाद कुछ शब्द-प्रयोग हुवा। कैसा लगा बताइयेगा ?



Wednesday, December 31, 2014

चलो फिर नए से शुरू करते हैं...

एक चाह नयी सी रखते हैं
कुछ लक्ष्य नया सा लेते हैं
जो बीत गया वो कल था
एक नयी कहानी बुनते हैं
चलो फिर नए से शुरू करते हैं

जो भूल हुई, फिर न दोहराएं
हम गिरकर ही तो सँभलते हैं
जो कुछ भी वक़्त से सीखा है
अनुभवों को साझा करते हैं
चलो फिर नए से शुरू करते हैं

कई साथ मिले, कुछ बिछुड़े भी 
हर यादों को ताज़ा रखते हैं 
हर लम्हे में एक सुन्दर रंग है 
जीवन हर इक रंग जी लेते हैं।  
चलो फिर नए से शुरू करते हैं 

Tuesday, April 22, 2014

ये नेता है, रंग बदलेंगे

ये नेता है, रंग बदलेंगे 

कुछ चुनावों से पहले 

कुछ चुनावों के बाद. 
कभी चुनावी साथी
कभी संग बदलेंगे 
ये नेता है, रंग बदलेंगे 

कुछ मौन रह कर 
तो कुछ बकबका कर, 
कुछ बस नौटंकियों से
देश का ढंग बदलेंगे 
ये नेता है, रंग बदलेंगे 

जाति-धर्म में बांटेंगे  
इतिहास नए सुनाएंगे, 
लुभावने से वादे देकर 
जनता को बस ठग लेंगे 
ये नेता है, रंग बदलेंगे 

कोशिश इस बार करें  
सोचें-जानें-समझें फिर चुनें 
वर्ना फिर इनका क्या है 
नस्ल गिरगिटिया, रंग बदलेंगे 
ये नेता है, रंग बदलेंगे 

Wednesday, March 19, 2014

मालाएं... A Photo Poetry

Through the Viewfinder - Photographs by Aditya


मालाएं हैं ये उन फूलों की 
प्रतिक है जो
श्रद्धा के, आस्था के 
हर देवालयों में अर्पित  
कहीं प्रार्थना तो कहीं बन दुवाएं 

सजता है, महकता है 
इन्ही से हर श्रृंगार 
इन्हे पहनाकर संबंध बने 
दिल एक हुवे परिवार 

ये बरसे आदर-हर्ष में 
हर उत्सव, हर त्यौहार 

जो ख़ुशी से आते हैं 
संग हँस लेती हूँ 
जो शोकाकुल आये 
गम बाँट लेती हूँ 
मेरे लिए तो ये हैं बस 
पेट पालने का आधार 


A Creative JV of Photography (Aditya) and Poetry (Prakash). Aditya is my colleague and friend. Away from HR (human resource) this is a experimentation on different areas of creativity. This one was clicked at Khanderao Market, Vadodara, Gujarat.   
Facebook page of Aditya :https://www.facebook.com/photosbyaditya


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